Wednesday, May 29, 2019

दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टेन चोटिल; इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में नहीं खेल पाएंगे

लंदन. वर्ल्ड कप 2019 शुरू होने से पहले दक्षिण अफ्रीका को झटका लगा है। उसके तेज गेंदबाज डेल स्टेन के कंधे की पुरानी चोट उभर आई है। वे इंग्लैंड के खिलाफ टीम के पहले मैच में नहीं खेलेंगे। टीम के कोच ओटिस गिब्सन ने साफ कर दिया है कि पहले मुकाबले में टीम को स्टेन की सेवाएं नहीं मिल सकेंगी। इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह मैच गुरुवार को द ओवल में खेला जाना है।

पुरानी चोट से परेशान
करीब दो साल पहले डेल स्टेन को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में कंधे में तकलीफ हुई थी। इसके बाद वे करीब दो साल से काफी कम क्रिकेट खेल रहे हैं। आईपीएल 2019 में भी वे ज्यादा नहीं खेल पाए थे। गिब्सन ने कहा, ‘हमें लगता है कि स्टेन पहले मैच के लिए पूरी तरह फिट नहीं हो पाएंगे। लिहाजा, हमें रणनीति में बदलाव करना होगा।’

वॉर्मअप मैच भी नहीं खेले
स्टेन के दूसरे मैच में भी उतरने को लेकर संशय है। यह मैच रविवार को द ओवल में ही बांग्लादेश के खिलाफ खेला जाएगा। 5 जून को दक्षिण अफ्रीका टीम इंडिया के खिलाफ मैदान में उतरेगी। अगर सब कुछ सही रहा तो स्टेन इस मैच में खेल सकते हैं। श्रीलंका के खिलाफ वॉर्मअप मैच में भी स्टेन नहीं खेले थे। गिब्सन ने कहा, ‘वर्ल्ड कप 6 हफ्ते चलेगा। यह लंबा शेड्यूल है। हम जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं ले सकते, इसलिए उन्हें फिट होने का वक्त दिया जा रहा है।’

रबाडा भी पूरी तरह फिट नहीं

दक्षिण अफ्रीका के लिए परेशानी की एक वजह और है। उनके मुख्य तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा खेल तो रहे हैं लेकिन आईपीएल के दौरान उनकी पीठ में चोट लगी थी। वे उससे पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। अगर ऐसा ही रहा तो वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका का बॉलिंग अटैक कमजोर हो जाएगा। इससे पहले एनरिक नोर्जे घायल होने की वजह से टीम से बाहर हो चुके हैं। कप्तान डुप्लेसिस के पास अब क्रिस मॉरिस और ड्वाइन प्रिटोरियस जैसे विकल्प मौजूद हैं।

देश की खातिर मैने वापसी की : इमरान
इमरान ने जिया उल हक के बारे में कहा, "मैं 1987 वर्ल्ड कप के बाद संन्यास ले चुका था, लेकिन लगभग एक साल बाद जनरल जिया ने राष्ट्रीय चैनल के जरिए मुझसे वापसी का अनुरोध किया। टीम के लिए बुलाए गए रात्रि भोज के दौरान वे मुझे दूसरे कमरे में ले गए। मुझसे कहा कि तुम क्या करने जा रहे हो? वापसी की बात को ठुकरा कर मेरा अपमान मत करना। आपको अपने देश की खातिर वापस आने के लिए कह रहा हूं। जनरल जिया के इन बातों के बाद मैंने देश के लिए क्रिकेट में वापसी की।'

खेल डेस्क. भारत ने अपने दूसरे वार्मअप मैच में बांग्लादेश को 95 रन से हरा दिया। इस मैच में महेंद्र सिंह धोनी ने 78 गेंद पर 113 रन की पारी खेली। उन्होंने 8 चौके और 7 छक्के लगाए। धोनी विकेट के पीछे से अक्सर फील्ड सेट करते नजर आते हैं, लेकिन इस मैच में वे बांग्लादेश के लिए फील्ड सेट करते नजर आए। उनका यह वीडियो वायरल हो रहा है।

मिड विकेट से स्क्वायर लेग पर जाने की सलाह दी
40वें ओवर में बांग्लादेश के शब्बीर गेंदबाजी करने आए। धोनी उस वक्त 60 रन पर खेल रहे थे। शब्बीर गेंदबाजी करने जा रहे थे, तभी धोनी ने उन्हें रोक दिया। धोनी स्टंप छोड़कर अलग खड़े हो गए। शब्बीर ने पूछा कि क्या हुआ तो धोनी फील्ड पर खड़े एक फील्डर को सही जगह बताने लगे। उन्होंने फील्डर को मिड विकेट से स्क्वायर लेग जाने की सलाह दी। इस पर शब्बीर भी मान गए। यह नजारा देख कमेंटेटर्स हंस पड़े। विरोधी टीम की फील्डिंग सेट करने का वीडियो देख सोशल मीडिया यूजर्स धोनी की खूब तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "वर्ल्ड कप में ऐसा अब तक नहीं देखा था। धोनी है तो मुमकिन है।"

Thursday, May 16, 2019

"Мы даже не мечтали!" В Узбекистане разблокировали сайты, критиковавшие власть

Узбекистан приостановил блокировку в интернете нескольких сайтов, которые до этого в течение более 10 лет были недоступны для пользователей внутри страны. С прошлой недели власти открыли доступ к порталам правозащитных организаций, а также зарубежных СМИ, критиковавших правящий режим.

Это решение уже приветствовали в ОБСЕ. В то же время разблокировка ресурсов может стать показательным жестом со стороны властей, поскольку некоторые оппозиционные и новостные сайты на территории Узбекистана по-прежнему остаются недоступными.

Например, в стране все еще нельзя открыть сайт узбекской версии Радио Свобода.

"Говорить, что в Узбекистане все теперь хорошо, будет преувеличением. Но мы стали намного свободнее, если сравнить ситуацию с временами Ислама Каримова или, скажем, с тем, что было три года назад. Раскрепощеннее стали и журналисты, и читатели, которые все чаще обращаются к критическим публикациям, социальные сети активны как никогда", - отмечает главный редактор Узбекской службы Би-би-си Хайрулло Файз.

С 2016 года власти Узбекистана предприняли ряд шагов по либерализации: объявили политическую амнистию, начали развивать туризм и пытаются привлечь в страну иностранные инвестиции.

В апреле представитель ОБСЕ по вопросам свободы СМИ Гарлем Дезир призвал власти Узбекистана разблокировать ряд сайтов и изменить нормативные акты, регулирующие доступ к информации и свободу выражения мнений.

10 мая руководитель Агентства по информации и массовым коммуникациям Узбекистана Комил Алламжонов сообщил о восстановлении доступа к сайтам Узбекской службы Би-би-си, Deutsche Welle, "Голоса Америки", Eurasianet.org, AsiaTerra, информационному агентству Fergana и некоторым другим СМИ, а также к страницам правозащитных организаций Amnesty International, Human Rights Watch и "Репортеры без границ".

Алламжонов отметил, что ранее все эти сайты были недоступны из-за "технического сбоя", который, по его словам, теперь был устранен.

Независимые комментаторы обращают внимание на то, что технические трудности в течение многих лет по какой-то причине возникали лишь у сайтов оппозиционных и зарубежных СМИ, а также у ряда правозащитных организаций.

Узбекистан начал блокировку ряда новостных и аналитических онлайн-ресурсов еще в 2005 году.

Тогда ряд стран Западной Европы, США, правозащитные и международные организации резко осудили действия властей Узбекистана во время столкновений в городе Андижан. В ходе тех событий погибло около 200 человек.

Разблокирование сайтов согласуется с политикой либерализации, проводимой президентом Узбекистана Шавкатом Мирзиёевым.

Он пришел к власти в конце 2016 года, сменив на этом посту Ислама Каримова, руководившего страной 25 лет и превратившего Узбекистан в одно из самых репрессивных государств в мире.

При Мирзиёеве Узбекистан медленно, но поднимается во Всемирном индексе свободы прессы. В 2017 году страна занимала 169 строчку, а в 2019 уже 160-ю, что означает, что Ташкент постепенно ослабляет государственную цензуру.

В последнее время в узбекском сегменте социальных сетей все громче звучали призывы к прекращению блокировки сайтов. Многие пользователи "Фейсбука" писали сообщения и посты дочери президента Саиде Мирзиёевой, которая недавно была назначена заместителем директора Агентства информации и массовых коммуникаций Узбекистана.

Растущая популярность социальных сетей также могла стать фактором, повлиявшим на решение властей снять блокировку.

Дело в том, что существенную часть контента на заблокированных веб-сайтах внутри страны все равно можно получить через страницы СМИ в "Фейсбуке", YouTube и на других социальных платформах. Все это делало блокировку сайтов не очень эффективной, но накладной для властей мерой.

"Я думаю, это одно из важнейших решений нынешнего правительства. Три года назад мы о таком даже не мечтали!" - говорит Файз.

"Надеюсь, власти пошли на этот шаг, осознавая, что без свободы слова другие реформы не дадут желаемого результата", - добавляет он.

Что все это значит?
Мнения о том, как интерпретировать шаг властей Узбекистана, разделились.

"Разблокирование некоторых сайтов СМИ и правозащитных организаций - это не признак демократизации или мудрости Алламжанова, а простая работа для создания позитивной атмосферы перед визитом президента Германии Штайнмайера", - считает базирующийся в США узбекский политолог Рафаэль Саттаров.

"Есть просто такая забава у режима - каждый раз перед визитом давать аккредитацию журналистам или разблокировать неугодные начальству сайты. При президенте Каримове блокировка и глушилка работали как часы, а для "позитивного контента" перед визитом крупного гостя обычно освобождали политзаключенных. Формы меняются, формы", - добавляет Саттаров.

"Я очень рад, что дожил до того, что это произошло. Это может звучать громко, но я считаю, что это решение - результат реформ, которые проводит президент. Очевидно, что это было бы невозможно при прежнем руководстве", - сказал генеральный директор разблокированного сайта Fergana.ru Даниил Кислов в интервью репортерам Repost.uz.

Представитель Human Rights Watch по Центральной Азии Стив Свердлов назвал окончание блокировки сайтов невероятно значительным шагом для свободы слова в Узбекистане.

В то же время политолог Алишер Ильхамов считает, что Мирзиёев мог просто последовать примеру своего предшественника, разблокировав только те средства массовой информации, которые он считает безопасными.

"Нельзя исключать, что правительство Мирзиёева восстанавливает эту практику избирательной блокировки, а также пытается сделать из этого пиар-кампанию", - сказал Ильхамов.

Friday, May 3, 2019

फणी: ओडिशा के पुरी तट से टकराया तूफ़ान, हवा की रफ़्तार 175 किलो मीटर प्रति घंटा

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफ़ान फणी ओडिशा के पुरी तट से टकरा चुका है. पुरी में हवा की रफ़्तार 165 से 175 किलोमीटर प्रति घंटा बतायी जा रही है.

तूफ़ान ने शुक्रवार सुबह 10.30 बजे पुरी में प्रवेश किया और ये रात 8 बजे या उससे देर तक प्रभावी रह सकता है. फणी उत्तर-पूर्वोत्तर की ओर आगे बढ़ेगा और अगले तीन घंटे में इस तूफ़ान की गति कम हो सकती है.

विशेष राहत आयुक्त बिश्नुपद सेठी ने इसकी जानकारी दी है. लगभग 10 लाख लोगों को इन तटीय इलाक़ों से सुरक्षित निकाला जा चुका है.

नौसेना और कोस्ट गार्ड को अलर्ट पर रखा गया है. लोगों की मदद के लिए एनडीआरएफ़ और ओडीआरएएफ़ की टीमें तैनात की गई हैं. तूफ़ान के असर को देखते हुए मध्य रात से उड़ानों पर रोक लगा दी गई है और सौ से ज़्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.

पुरी के क़रीब तट से टकराने के बाद ये तूफ़ान तटीय ओडिशा के खुर्दा, कटक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाडा, जाजपुर, भद्रक और बालेश्वर ज़िलों के रास्ते पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा और फिर बांग्लादेश का रुख़ करेगा. मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज़मीन के संपर्क में आने के बाद तूफ़ान की तीव्रता कम होगी .

मौसम विभाग का अनुमान है कि तूफ़ान फणी के असर से रायगड़ा, गंजाम, गजपति, कंधमाल, नयागढ़, में भी भारी बारिश हो सकती है .

अधिकारियों का कहना है कि तूफ़ान के असर से पुरी सहित पूरे तटीय ओडिशा में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश होगी और तेज़ हवाएं चलेंगी.

भुवनेश्वर स्थित मौसम केंद्र के निदेशक एच. के. विश्वास ने बताया कि दक्षिणी तट पर गंजाम से लेकर उत्तरी तट में बालेश्वर तक विस्तृत इलाक़े में 200 से 250 मिलीमीटर तक बारिश होगी. कुछ स्थानों पर 300 मिलीमीटर से भी अधिक बारिश हो सकती है . बारिश और तेज़ हवा के कारण पेड़ गिर सकते हैं जिससे सड़क और संचार माध्यम को नुक़सान हो सकता है. तटीय ओडिशा के अधिकांश इलाक़ों में गुरुवार दोपहर से ही बारिश हो रही है.

ओडिशा सरकार ने 'जीरो केजुएलटी' यानी जनहानि को पूरी तरह रोकने के लक्ष्य के साथ राज्य के 480 किलोमीटर लंबे तट के किनारे कच्चे मकान में रहनेवाले 11 लाख से भी अधिक लोगों को गुरुवार शाम तक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई थी. लेकिन कई स्थान पर लोग अपने मकान छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हुए और देर रात तक उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रहीं. रात दो बजे तक क़रीब दस लाख से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जा चुका है.

विशेष राहत आयुक्त विष्णुपद सेठी ने गुरुवार शाम को बताया कि स्थानांतरित लोगों को तट पर बने क़रीब 900 'साइक्लोन शेल्टर' और अन्य पक्के मकानों में ठहराया गया है . सेठी ने कहा, "हर शेल्टर में खाद्य सामग्री, पीने का पानी और अन्य ज़रुरी सामान रखे गए हैं और 50 स्वयंसेवी तैनात किए गए हैं ."

बचाव कार्य और तूफ़ान के बाद क्षतिग्रस्त सड़क, बिजली और संचार माध्यम को तत्काल बहाल करने के लिए 'नेशनल डिजास्टर रेस्पोंस फ़ोर्स' (एनडीआरएफ) की 28 टीमें और 'ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फ़ोर्स' (ओडीआरएएफ) के 20 दल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिए गए हैं .

एक लाख से अधिक खाने के पैकेट तैयार कर इन इलाक़ों में पहुंचाए जा रहे हैं . सेठी ने बताया कि ज़रुरत पड़ने पर पानी में घिरे लोगों के लिए आकाश मार्ग से खाद्य सामग्री गिराने के लिए वायु सेना के दो हेलिकॉप्टर तैयार रखे गए हैं.

एहतियात के तौर पर भद्रक से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के बीच चलनेवाली 100 से अधिक ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है . गुरुवार मध्यरात्रि से अगले 24 घंटे तक भुवनेश्वर हवाई अड्डे से सभी विमान सेवाओं को भी रद्द किया गया है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार शाम आला अधिकारियों के साथ तूफ़ान की ताज़ा स्थिति तथा राहत और बचाव कार्य की समीक्षा की . बैठक के बाद उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शुक्रवार को घर से न निकलें . मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पाढ़ी ने कहा कि तूफ़ान के 'लैंडफॉल' के बाद कुछ देर तक बारिश और हवा की गति कम हो जाती है. लेकिन इस समय बाहर निकलना जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए तूफ़ान के दौरान या उसके तत्काल बाद लोग घर से बाहर निकलने की कोशिश न करें .

Tuesday, April 30, 2019

फ़िल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा पहले हिरासत में, फिर रिहा मगर क्यों?

फ़िल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा का नाम नए विवाद से जुड़ गया है. फ़िल्म 'लक्ष्मीज़ एनटीआर' (Lakshmi's NTR) को लेकर बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस की वजह से आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की पुलिस ने उन्हें और फ़िल्म के प्रोड्यूसर को हिरासत में ले लिया. बाद में उन्हें हैदराबाद वापस भेज दिया गया.

रामगोपाल वर्मा का आरोप है कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस विजयवाड़ा के इलापुरम होटल में होनी थी, जब उसमें बाधा डाली गई तब उन्होंने विजयवाड़ा की पाइलपुला रोड के एनटीआर सर्किल में मीडिया के लोगों से मुलाकात करने का फ़ैसला किया.

रामगोपाल वर्मा जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए पहुंचे तो उन्हें और फ़िल्म के प्रोड्यूसर राकेश रेड्डी को हिरासत में ले लिया गया. हिरासत में लेने के बाद उन्हें विजयवाड़ा एयरपोर्ट के लाउंज में शिफ्ट कर दिया गया. बाद में उन्हें हैदराबाद वापस भेज दिया गया.

विजयवाड़ा पुलिस के मुताबिक वर्मा के खिलाफ़ कार्रवाई कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और आदर्श आचार संहिता की वजह से की गई.

'लक्ष्मीज़ एनटीआर' फ़िल्म बीते करीब दो महीने से विवादों में है. इस फ़िल्म का निर्देशन राम गोपाल वर्मा ने किया है. रिपोर्टों के मुताबिक ये फ़िल्म आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव की बायोपिक की तरह है. इस फ़िल्म में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के किरदार को नेगेटिव शेड में दिखाया गया है.

फ़िल्म का विवाद न्यायालय में भी पहुंचा. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने आंध्र प्रदेश में फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगा दी. इससे आंध्र प्रदेश में फ़िल्म की रिलीज़ टल गई.

हालांकि ये फिल्म तेलंगाना और दूसरी जगहों पर प्रदर्शित हो गई. राम गोपाल वर्मा आंध्र प्रदेश में फ़िल्म की रिलीज़ को लेकर मीडिया से बात करना चाहते थे. आंध्र प्रदेश में ये फ़िल्म एक मई को रिलीज़ होनी है. वर्मा ने शनिवार को बताया कि फ़िल्म के प्रमोशन के लिए वो मीडिया से मुलाकात करने वाले हैं.

वर्मा ने आरोप लगाया कि तैयारियों के बाद भी होटलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए दी गई अनुमति रद्द कर दी.

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस की इजाज़त वापस लेने वाले होटलों ने उनसे पेमेंट पहले ही ले लिया था.

इसके बाद उन्होंने कहा कि वो शाम चार बजे सड़क पर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और कहा कि जो 'एनटीआर के वास्तविक प्रशंसक हैं और जो सच का सम्मान करते हैं' वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लें. इसके बाद ही मौजूदा विवाद शुरू हुआ.

विजयवाड़ा पुलिस के मुताबिक कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना को देखते हुए उन्होंने रामगोपाल वर्मा को नोटिस दिया था.

वर्मा को एयरपोर्ट पर जो नोटिस दिया गया, उसमें कहा गया था कि जब दंड संहिता की धारा 30 और धारा 144 लागू हो तब सड़क पर सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस किसी स्थिति में नहीं हो सकती है.

उनसे तुरंत विजयवाड़ा छोड़ देने को कहा गया. पुलिस के मुताबिक नोटिस का उल्लंघन कर आगे बढ़ने पर उन्हें हिरासत में लिया गया. पुलिस के मुताबिक रामगोपाल वर्मा की ओर से नोटिस के उल्लंघन को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पुलिस से ये जानकारी मिलने पर कि पाइपुला रोड पर एनटीआर सर्किल के करीब छात्रों की परीक्षा हो रही है, रामगोपाल वर्मा ने सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करने का फैसला किया. उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि उन्हें होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इजाज़त दी जाए. लेकिन उन्हें और रेड्डी को हिरासत में ले लिया गया.

रामगोपाल वर्मा ने ट्विटर पर पोस्ट किए वीडियो में कहा है, "हमें जबरन एक कार में बिठाकर एयरपोर्ट लाया गया. हमें बताया गया कि हमें विजयवाड़ा नहीं आना चाहिए और न ही यहां रुकना चाहिए. मुझे इसके किसी कारण की जानकारी नहीं है. कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए. लेकिन हमें उन्होंने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया."

होटल इलापुरम की फ्रंट ऑफिस इनचार्ज रजिता ने बताया, "रामगोपाल वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए एक कमरा बुक किया था लेकिन वो होटल नहीं आए."

उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कराने का निर्देश दिया था. उन्होंने वर्मा की इस बात को ग़लत बताया कि होटल ने पहले ही पैसे ले लिए थे. उन्होंने बताया कि बुकिंग के बाद भी होटल में कोई नहीं आया.

Thursday, April 4, 2019

500 किमी. रेंज वाली मिसाइलों से लैस 6 पनडुब्बियां बनाने का प्रस्ताव, बजट 50 हजार करोड़ रु.

नई दिल्ली. भारतीय नौसेना ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट-75 के अंतर्गत 6 सबमरीन हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी लागत 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। जितने भी विदेशी विक्रेताओं ने इस बड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेने की रूचि दिखाई, उनके लिए नौसेना ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है।

50 फीसदी बड़ी पनडुब्बी चाहती है नौसेना

भारतीय नौसेना प्रोजेक्ट-75 के अंतर्गत ऐसी 6 डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन का निर्माण करवाना चाहती है, जो फिलहाल मुंबई की माजागोन डॉकयॉर्ड्स लिमिटेड में बन रही स्कॉर्पिन सबमरीन से 50 फीसदी बड़ी हो। नौसेना का प्रस्ताव है कि यह सबमरीन 500 किमी रेंज वाली मिसाइलों से लैस हों।

भारतीय पार्टनर्स को भी आमंत्रित किया गया
सूत्र ने बताया कि जो भी विदेशी विक्रेता इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने के इच्छुक हैं, उनके लिए प्राथमिक मसौदा जारी कर दिया गया है। इस प्रक्रिया की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पॉलिसी के अंतर्गत भारतीय पार्टनर्स के सुझावों को भी आमंत्रित किया गया है ताकि इसके निर्माण में उनके सुझाव भी शामिल हों।

नौसेना की मांग- सबमरीन पर क्रूज मिसाइल हो

नौसेना की योजना है कि इस सबमरीन पर जमीन पर हमला करने वाली 12 क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ एंटी-शिप क्रूज मिसाइल भी मौजूद हों। सूत्रों ने बताया कि नौसेना ने यह स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि यह पनडुब्बी 18 भारी-भरकम टॉर्पेडो को लादने और लॉन्च करने में सक्षम होना चाहिए।  

नई पनडुब्बियां भारी-भरकम टॉर्पेडो से लैस

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस प्रोजेक्ट का इंचार्ज नेवी अधिकारी को बनाया है। स्कॉर्पिन सबमरीन की तुलना में यह पनडुब्बी न सिर्फ भारी-भरकम टॉर्पिडो से लैस होगी बल्कि सतह पर मार करने वाली मिसाइल भी इस पर होगी। 

चीन का सामना करने के लिए तैयारी

भारतीय नौसेना के पास सौ से ज्यादा पनडुब्बियां और युद्ध करने में सक्षम जहाज मौजूद हैं जबकि पाकिस्तान के पास इनकी संख्या केवल 20 हैं। हालांकि भारतीय नौसेना की यह तैयारी चीनी नौसेना से सामना करने के लिए है।

Wednesday, January 23, 2019

中国华为争议:加拿大前情报头目警告5G网络风险

加拿大前情报头目撰文说,因为安全风险太大,加拿大应该禁止中国华为为该国5G网路提供设备。这是继上月英国情报部门负责人对中国新技术主宰的安全威胁发出警告后,又一位西方情报界人物发出类似警告。

加拿大是西方所谓“五眼情报联盟”的成员,即加拿大,美国,英国,澳大利亚和新西兰组成的情报机构联盟,他们在反间谍,反恐和对付外部威胁时分享情报,互相提供支持。

华为的国家安全风险:西方和盟国联合布防
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中国高科技巨头华为公司参加西方国家的5G网络建设在“五眼情报联盟”国家中引起警惕。目前英国和加拿大仍然未对是否禁止华为作出最后决定。日本和韩国已经跟随“五眼情报联盟”对华为进行抵制。

中国大使警告
中国上周警告渥太华不要制裁华为。中国大使上周威胁说,如果渥太华对华为实行制裁,将面临后果。上月加拿大按照美国的引渡要求在加拿大逮捕了过境的华为高管孟晚舟,此后加拿大和中国关系急剧恶化。

理查德·法登(Richard Fadden)在2009-2013年间担任加拿大安全情报部门的负责人,他引述了其所谓的充分证据,要求禁止中国的华为公司。

法登说,“加拿大政府不应该理睬这个(中国大使)的威胁,要禁止华为设备进入加拿大的5G网络,保护加拿大人的安全。”

他在加拿大《环球邮报》上撰文说,“中国采取了把加拿大人处死的办法来捍卫中国顶尖的公司,如果让中共随心所欲进入加拿大的通信网络,他们还会怎么做呢?”

加拿大官员正在研究最新一代的移动通讯5G网络的安全问题。一名知情的消息人士最近表示,加拿大官员需要一段时间才能对此问题产生报告。

加拿大公共安全部长拉尔夫·古戴尔对记者说,加拿大未来的5G网络会使用其它公司的设备,但是他没有作出进一步说明。

此前,军情六处负责人扬格(Alex Younger)讲述面对目前的威胁和地缘政治变化时说,中国的新技术主宰在未来对西方构成更大的安全威胁。他说,对于新兴的5G网络依赖中国技术的问题,需要考虑其对国家未来安全状况的影响。

军情六处负责人在去年12月的讲话中特别提到中国领导人习近平宣布“中国制造”战略,以及要在智能通讯,人工智能,合成生物学和基因学领域占主导地位的雄心。

“五眼”国家的情报部门负责人在2018年数次提醒加拿大总理特鲁多警惕中国的华为对加拿大潜在的安全威胁。加拿大媒体曾报道说,在孟晚舟被捕前几个月,特鲁多和“五眼”国家主管会面。

《华尔街日报》报道,美国也对德国有关当局施加压力,要他们放弃使用华为。欧洲最大的电讯公司德国电讯表示在审查他们的全球采购政策,要考虑关于中国制造商的网络安全顾虑。

在华为首席财务官,华为创始人的女儿孟晚舟在加拿大被捕后,中国要求加拿大立即放人,之后中国逮捕了两名加拿大人。最近中国的法庭将一名因贩毒被囚禁的加拿大人宣判死刑。

加拿大驻华大使麦家廉周五(1月18日)说,争取两名被中国逮捕的加拿大人获释,并且要求中国废除死刑判决是他工作的当务之急。

最近,来自19个国家140多名学者和前外交官给中国领导人习近平发出联名信,呼吁释放两名被中国逮捕的加拿大人。联名信警告说,中国逮捕两名加拿大人对外发出了"跨境交流在中国是不受欢迎的,甚至是危险的"信号。

中国外交部发言人华春莹周二(1月22日)回应说,这封信代表不了国际社会的主流声音,它既是对从事正常中外交流人士的不尊重,也是对中国司法精神的不尊重。华春莹还说,加拿大前情报头目理查德·法登的言论是无稽之谈

Sunday, January 6, 2019

क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?

चीनी का ये क़ुदरती रूप होता है, जो कमोबेश हर फल में पाया जाता है. इसे नुक़सानदेह नही माना जाता. अगर आप इसे संतुलित रूप से लेंस तो. असल में जब हम फल खाते हैं, तो इस में मौजूद फाइबर भी फ्रक्टोज़ के साथ हमारे शरीर में जाते हैं. इन्हें तोड़ने और ख़ून मे घुलने में वक़्त लगता है.

लेकिन, जब हम फलों रस लेते हैं, तो फ़ाइबर अलग हो जाता है. सिर्फ फ्रक्टोज़ और कुछ विटामिन ही उस में रह जाते हैं, जो हमारे शरीर में जाते हैं. ब्रिटेन की डायबिटीज़ के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी एम्मा एल्विन कहती हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस या 30 ग्राम चीनी लेने की सलाह देता है.

जब हम फलों का रस लेते हैं, तो फ्रक्टोज़ तेज़ी से हमारे ख़ून में घुल जाता है. ख़ून में अचानक चीनी की मात्रा बढ़ती है, तो हमारा अग्न्याशय इंसुलिन नाम का हारमोन छोड़ता है, जो चीनी की मात्रा को नियंत्रित करता है.

ऐसा अगर लगातार होता है, तो लोगों को टाइप 2 डायबिटीज़ होने की आशंका बढ़ जाती है. 1986 से 2009 के बीच एक लाख लोगों पर हुए रिसर्च के मुताबिक़, लगातार फलों का रस लेने का सीधा ताल्लुक़ टाइप-2 डायबिटीज़ से पाया गया है.

फलों के रस और टाइप-2 डायबिटीज़ के बीच ताल्लुक़ साबित करने वाला एक और रिसर्च भी हुआ था, जो 70 हज़ार लोगों के बीच 18 साल तक किया गया था. जानकार कहते हैं कि फलों का रस तेज़ी से हमारे शरीर में घुल जाता है. इसलिए चीनी की मात्रा अचानक बढ़ जाती है.

अगर फलों के जूस में सब्ज़ियों की कुछ तादाद भी मिली हो, तो ये फलों के रस के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर होगा. हालांकि फ़ाइबर इनमें भी नहीं होता. मगर, ये हमारे ख़ून में देर से घुलेंगे, तो चीनी की मात्रा अचानक से नहीं बढ़ेगी.

कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के जॉन सिवेनपाइपर ने 155 रिसर्च का निचोड़ निकाला, तो उन्होंने पाया कि फ्रूट जूस और चीनी मिले दूसरे सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैलोरी के मामले में ज़्यादा फ़र्क नहीं होता. जैसे कॉर्न सिरप या शहद. इनमें काफ़ी मात्रा में कैलोरी होती है. इन्हें ज़्यादा लेने पर वज़न कम करने का एजेंडा पटरी से उतर सकता है.

हालांकि अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानक यानी रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस लेने पर इसका नुक़सान नहीं होता. सिवेनपाइपर का रिसर्च कहता है कि फ्रक्टोज़ वाले फलों के रस को नियमित रूप से लेने पर ख़ून में चीनी की तादाद संतुलित रहती है. शर्त ये है कि इसे रोज़ाना 150 मिलीलीटर से ज़्यादा न लिया जाए.

सिवेनपाइपर कहते हैं, 'फलों के जूस के मुक़ाबले फल खाना सेहत के लिए बेहतर है. लेकिन, अगर आप फलों और सब्ज़ियों के साथ थोड़ा सा जूस लेते हैं, तो ठीक है. ध्यान रहे कि जूस को पानी की जगह पीना आप के लिए ख़तरनाक है.'

पिछले साल छपे एक तजुर्बे के आधार पर हम फलों के जूस को सेहतमंद बना सकते हैं. जो सामान्य जूसर होते हैं, उनकी जगह पोषक तत्व निकालने वाले ब्लेंडर का इस्तेमाल कर के जूस निकाला जाए, तो इसमें कुछ बीज और फाइबर रह जाएंगे. इस तरह से तैयार जूस नुक़सान नहीं करेगा.

ब्रिटेन की प्लाईमाउथ यूनिवर्सिटी में पोषण की विशेषज्ञ गेल रीस कहती हैं कि, 'इस रिसर्च में जो जूस निकाला गया, उसमें फलों के बीज और छिलके भी थे, तो, हम इस पर पक्के तौर पर भरोसा नहीं कर सकते.

बेहतर होगा कि हम 150 मिलीलीटर रोज़ाना की मियाद पर क़ायम रहकर फलों का रस लें. इससे शरीर में चीनी की मात्रा संतुलित रहेगी. जब जूस में थोड़े रेशे होते हैं, तो ये देर से ख़ून में घुलता है. लेकिन, ज़्यादा तादाद में जूस लेना फिर भी हानिकारक ही है.'

हम जूस निकालने के लिए पका फल लें, तो ये और बेहतर होगा. वैसे हर फल की अलग तासीर होती है. जैसे कि अंगूर को ही लें. इसका जो बीज होता है, उसमें कई अहम अवयव होते हैं, न कि गूदे में. वहीं संतरे के बहुत से पोषक तत्व इसके छिलके में होते हैं.

बहुत से लोग जूस इसलिए लेते हैं कि इससे शरीर में जमा कचरा साफ हो जाएगा. ये शराब, ड्रग या दूसरी नुक़सान करने वाली चीज़ों की वजह से हमारे शरीर में जमा होता है.

लेकिन, जानकार कहते हैं कि जूस पीकर डिटॉक्स करने की सोच हास्यास्पद है. हमारा शरीर ख़ुद को डिटॉक्स करना जानता है. इसलिए जूस गटकने की ज़रूरत नहीं है.

जूस से ही सारे पोषक तत्व मिल जाएं, ऐसा भी नहीं है. कई बार जूस विटामिन मिले चीनी के घोल से ज़्यादा कुछ नहीं होते. फलों के दूसरे हिस्सों में भी पोषक तत्व होते हैं, जो जूस निकालने के दौरान अलग हो जाते हैं.

लोग, दिन में पांच बार फल और सब्ज़ियां खाने की सोचते हैं. उन्हे समझना होगा कि फलों और सब्ज़ियों से केवल विटामिन नहीं हासिल होता. इससे हम कार्बोहाइड्रेट खाने की मात्रा भी घटाते हैं.

तो, कुल मिलाकर ये कहें कि रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस लेते हैं, तो ये नुक़सान नहीं करेगा. फिर भी, बेहतर ये हो कि फलो को खाया जाए, न कि उनका जूस निकालकर पिया जाए.