加拿大前情报头目撰文说,因为安全风险太大,加拿大应该禁止中国华为为该国5G网路提供设备。这是继上月英国情报部门负责人对中国新技术主宰的安全威胁发出警告后,又一位西方情报界人物发出类似警告。
加拿大是西方所谓“五眼情报联盟”的成员,即加拿大,美国,英国,澳大利亚和新西兰组成的情报机构联盟,他们在反间谍,反恐和对付外部威胁时分享情报,互相提供支持。
华为的国家安全风险:西方和盟国联合布防
华为资助英国大学研究被指为“军工行动”
被华为被视作中国崛起缩影 任正非之女被捕激怒北京
中国高科技巨头华为公司参加西方国家的5G网络建设在“五眼情报联盟”国家中引起警惕。目前英国和加拿大仍然未对是否禁止华为作出最后决定。日本和韩国已经跟随“五眼情报联盟”对华为进行抵制。
中国大使警告
中国上周警告渥太华不要制裁华为。中国大使上周威胁说,如果渥太华对华为实行制裁,将面临后果。上月加拿大按照美国的引渡要求在加拿大逮捕了过境的华为高管孟晚舟,此后加拿大和中国关系急剧恶化。
理查德·法登(Richard Fadden)在2009-2013年间担任加拿大安全情报部门的负责人,他引述了其所谓的充分证据,要求禁止中国的华为公司。
法登说,“加拿大政府不应该理睬这个(中国大使)的威胁,要禁止华为设备进入加拿大的5G网络,保护加拿大人的安全。”
他在加拿大《环球邮报》上撰文说,“中国采取了把加拿大人处死的办法来捍卫中国顶尖的公司,如果让中共随心所欲进入加拿大的通信网络,他们还会怎么做呢?”
加拿大官员正在研究最新一代的移动通讯5G网络的安全问题。一名知情的消息人士最近表示,加拿大官员需要一段时间才能对此问题产生报告。
加拿大公共安全部长拉尔夫·古戴尔对记者说,加拿大未来的5G网络会使用其它公司的设备,但是他没有作出进一步说明。
此前,军情六处负责人扬格(Alex Younger)讲述面对目前的威胁和地缘政治变化时说,中国的新技术主宰在未来对西方构成更大的安全威胁。他说,对于新兴的5G网络依赖中国技术的问题,需要考虑其对国家未来安全状况的影响。
军情六处负责人在去年12月的讲话中特别提到中国领导人习近平宣布“中国制造”战略,以及要在智能通讯,人工智能,合成生物学和基因学领域占主导地位的雄心。
“五眼”国家的情报部门负责人在2018年数次提醒加拿大总理特鲁多警惕中国的华为对加拿大潜在的安全威胁。加拿大媒体曾报道说,在孟晚舟被捕前几个月,特鲁多和“五眼”国家主管会面。
《华尔街日报》报道,美国也对德国有关当局施加压力,要他们放弃使用华为。欧洲最大的电讯公司德国电讯表示在审查他们的全球采购政策,要考虑关于中国制造商的网络安全顾虑。
在华为首席财务官,华为创始人的女儿孟晚舟在加拿大被捕后,中国要求加拿大立即放人,之后中国逮捕了两名加拿大人。最近中国的法庭将一名因贩毒被囚禁的加拿大人宣判死刑。
加拿大驻华大使麦家廉周五(1月18日)说,争取两名被中国逮捕的加拿大人获释,并且要求中国废除死刑判决是他工作的当务之急。
最近,来自19个国家140多名学者和前外交官给中国领导人习近平发出联名信,呼吁释放两名被中国逮捕的加拿大人。联名信警告说,中国逮捕两名加拿大人对外发出了"跨境交流在中国是不受欢迎的,甚至是危险的"信号。
中国外交部发言人华春莹周二(1月22日)回应说,这封信代表不了国际社会的主流声音,它既是对从事正常中外交流人士的不尊重,也是对中国司法精神的不尊重。华春莹还说,加拿大前情报头目理查德·法登的言论是无稽之谈
Wednesday, January 23, 2019
Sunday, January 6, 2019
क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?
चीनी का ये क़ुदरती रूप होता है, जो कमोबेश हर फल में पाया जाता है. इसे नुक़सानदेह नही माना जाता. अगर आप इसे संतुलित रूप से लेंस तो. असल में जब हम फल खाते हैं, तो इस में मौजूद फाइबर भी फ्रक्टोज़ के साथ हमारे शरीर में जाते हैं. इन्हें तोड़ने और ख़ून मे घुलने में वक़्त लगता है.
लेकिन, जब हम फलों रस लेते हैं, तो फ़ाइबर अलग हो जाता है. सिर्फ फ्रक्टोज़ और कुछ विटामिन ही उस में रह जाते हैं, जो हमारे शरीर में जाते हैं. ब्रिटेन की डायबिटीज़ के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी एम्मा एल्विन कहती हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस या 30 ग्राम चीनी लेने की सलाह देता है.
जब हम फलों का रस लेते हैं, तो फ्रक्टोज़ तेज़ी से हमारे ख़ून में घुल जाता है. ख़ून में अचानक चीनी की मात्रा बढ़ती है, तो हमारा अग्न्याशय इंसुलिन नाम का हारमोन छोड़ता है, जो चीनी की मात्रा को नियंत्रित करता है.
ऐसा अगर लगातार होता है, तो लोगों को टाइप 2 डायबिटीज़ होने की आशंका बढ़ जाती है. 1986 से 2009 के बीच एक लाख लोगों पर हुए रिसर्च के मुताबिक़, लगातार फलों का रस लेने का सीधा ताल्लुक़ टाइप-2 डायबिटीज़ से पाया गया है.
फलों के रस और टाइप-2 डायबिटीज़ के बीच ताल्लुक़ साबित करने वाला एक और रिसर्च भी हुआ था, जो 70 हज़ार लोगों के बीच 18 साल तक किया गया था. जानकार कहते हैं कि फलों का रस तेज़ी से हमारे शरीर में घुल जाता है. इसलिए चीनी की मात्रा अचानक बढ़ जाती है.
अगर फलों के जूस में सब्ज़ियों की कुछ तादाद भी मिली हो, तो ये फलों के रस के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर होगा. हालांकि फ़ाइबर इनमें भी नहीं होता. मगर, ये हमारे ख़ून में देर से घुलेंगे, तो चीनी की मात्रा अचानक से नहीं बढ़ेगी.
कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के जॉन सिवेनपाइपर ने 155 रिसर्च का निचोड़ निकाला, तो उन्होंने पाया कि फ्रूट जूस और चीनी मिले दूसरे सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैलोरी के मामले में ज़्यादा फ़र्क नहीं होता. जैसे कॉर्न सिरप या शहद. इनमें काफ़ी मात्रा में कैलोरी होती है. इन्हें ज़्यादा लेने पर वज़न कम करने का एजेंडा पटरी से उतर सकता है.
हालांकि अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानक यानी रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस लेने पर इसका नुक़सान नहीं होता. सिवेनपाइपर का रिसर्च कहता है कि फ्रक्टोज़ वाले फलों के रस को नियमित रूप से लेने पर ख़ून में चीनी की तादाद संतुलित रहती है. शर्त ये है कि इसे रोज़ाना 150 मिलीलीटर से ज़्यादा न लिया जाए.
सिवेनपाइपर कहते हैं, 'फलों के जूस के मुक़ाबले फल खाना सेहत के लिए बेहतर है. लेकिन, अगर आप फलों और सब्ज़ियों के साथ थोड़ा सा जूस लेते हैं, तो ठीक है. ध्यान रहे कि जूस को पानी की जगह पीना आप के लिए ख़तरनाक है.'
पिछले साल छपे एक तजुर्बे के आधार पर हम फलों के जूस को सेहतमंद बना सकते हैं. जो सामान्य जूसर होते हैं, उनकी जगह पोषक तत्व निकालने वाले ब्लेंडर का इस्तेमाल कर के जूस निकाला जाए, तो इसमें कुछ बीज और फाइबर रह जाएंगे. इस तरह से तैयार जूस नुक़सान नहीं करेगा.
ब्रिटेन की प्लाईमाउथ यूनिवर्सिटी में पोषण की विशेषज्ञ गेल रीस कहती हैं कि, 'इस रिसर्च में जो जूस निकाला गया, उसमें फलों के बीज और छिलके भी थे, तो, हम इस पर पक्के तौर पर भरोसा नहीं कर सकते.
बेहतर होगा कि हम 150 मिलीलीटर रोज़ाना की मियाद पर क़ायम रहकर फलों का रस लें. इससे शरीर में चीनी की मात्रा संतुलित रहेगी. जब जूस में थोड़े रेशे होते हैं, तो ये देर से ख़ून में घुलता है. लेकिन, ज़्यादा तादाद में जूस लेना फिर भी हानिकारक ही है.'
हम जूस निकालने के लिए पका फल लें, तो ये और बेहतर होगा. वैसे हर फल की अलग तासीर होती है. जैसे कि अंगूर को ही लें. इसका जो बीज होता है, उसमें कई अहम अवयव होते हैं, न कि गूदे में. वहीं संतरे के बहुत से पोषक तत्व इसके छिलके में होते हैं.
बहुत से लोग जूस इसलिए लेते हैं कि इससे शरीर में जमा कचरा साफ हो जाएगा. ये शराब, ड्रग या दूसरी नुक़सान करने वाली चीज़ों की वजह से हमारे शरीर में जमा होता है.
लेकिन, जानकार कहते हैं कि जूस पीकर डिटॉक्स करने की सोच हास्यास्पद है. हमारा शरीर ख़ुद को डिटॉक्स करना जानता है. इसलिए जूस गटकने की ज़रूरत नहीं है.
जूस से ही सारे पोषक तत्व मिल जाएं, ऐसा भी नहीं है. कई बार जूस विटामिन मिले चीनी के घोल से ज़्यादा कुछ नहीं होते. फलों के दूसरे हिस्सों में भी पोषक तत्व होते हैं, जो जूस निकालने के दौरान अलग हो जाते हैं.
लोग, दिन में पांच बार फल और सब्ज़ियां खाने की सोचते हैं. उन्हे समझना होगा कि फलों और सब्ज़ियों से केवल विटामिन नहीं हासिल होता. इससे हम कार्बोहाइड्रेट खाने की मात्रा भी घटाते हैं.
तो, कुल मिलाकर ये कहें कि रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस लेते हैं, तो ये नुक़सान नहीं करेगा. फिर भी, बेहतर ये हो कि फलो को खाया जाए, न कि उनका जूस निकालकर पिया जाए.
लेकिन, जब हम फलों रस लेते हैं, तो फ़ाइबर अलग हो जाता है. सिर्फ फ्रक्टोज़ और कुछ विटामिन ही उस में रह जाते हैं, जो हमारे शरीर में जाते हैं. ब्रिटेन की डायबिटीज़ के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी एम्मा एल्विन कहती हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस या 30 ग्राम चीनी लेने की सलाह देता है.
जब हम फलों का रस लेते हैं, तो फ्रक्टोज़ तेज़ी से हमारे ख़ून में घुल जाता है. ख़ून में अचानक चीनी की मात्रा बढ़ती है, तो हमारा अग्न्याशय इंसुलिन नाम का हारमोन छोड़ता है, जो चीनी की मात्रा को नियंत्रित करता है.
ऐसा अगर लगातार होता है, तो लोगों को टाइप 2 डायबिटीज़ होने की आशंका बढ़ जाती है. 1986 से 2009 के बीच एक लाख लोगों पर हुए रिसर्च के मुताबिक़, लगातार फलों का रस लेने का सीधा ताल्लुक़ टाइप-2 डायबिटीज़ से पाया गया है.
फलों के रस और टाइप-2 डायबिटीज़ के बीच ताल्लुक़ साबित करने वाला एक और रिसर्च भी हुआ था, जो 70 हज़ार लोगों के बीच 18 साल तक किया गया था. जानकार कहते हैं कि फलों का रस तेज़ी से हमारे शरीर में घुल जाता है. इसलिए चीनी की मात्रा अचानक बढ़ जाती है.
अगर फलों के जूस में सब्ज़ियों की कुछ तादाद भी मिली हो, तो ये फलों के रस के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर होगा. हालांकि फ़ाइबर इनमें भी नहीं होता. मगर, ये हमारे ख़ून में देर से घुलेंगे, तो चीनी की मात्रा अचानक से नहीं बढ़ेगी.
कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के जॉन सिवेनपाइपर ने 155 रिसर्च का निचोड़ निकाला, तो उन्होंने पाया कि फ्रूट जूस और चीनी मिले दूसरे सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैलोरी के मामले में ज़्यादा फ़र्क नहीं होता. जैसे कॉर्न सिरप या शहद. इनमें काफ़ी मात्रा में कैलोरी होती है. इन्हें ज़्यादा लेने पर वज़न कम करने का एजेंडा पटरी से उतर सकता है.
हालांकि अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानक यानी रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस लेने पर इसका नुक़सान नहीं होता. सिवेनपाइपर का रिसर्च कहता है कि फ्रक्टोज़ वाले फलों के रस को नियमित रूप से लेने पर ख़ून में चीनी की तादाद संतुलित रहती है. शर्त ये है कि इसे रोज़ाना 150 मिलीलीटर से ज़्यादा न लिया जाए.
सिवेनपाइपर कहते हैं, 'फलों के जूस के मुक़ाबले फल खाना सेहत के लिए बेहतर है. लेकिन, अगर आप फलों और सब्ज़ियों के साथ थोड़ा सा जूस लेते हैं, तो ठीक है. ध्यान रहे कि जूस को पानी की जगह पीना आप के लिए ख़तरनाक है.'
पिछले साल छपे एक तजुर्बे के आधार पर हम फलों के जूस को सेहतमंद बना सकते हैं. जो सामान्य जूसर होते हैं, उनकी जगह पोषक तत्व निकालने वाले ब्लेंडर का इस्तेमाल कर के जूस निकाला जाए, तो इसमें कुछ बीज और फाइबर रह जाएंगे. इस तरह से तैयार जूस नुक़सान नहीं करेगा.
ब्रिटेन की प्लाईमाउथ यूनिवर्सिटी में पोषण की विशेषज्ञ गेल रीस कहती हैं कि, 'इस रिसर्च में जो जूस निकाला गया, उसमें फलों के बीज और छिलके भी थे, तो, हम इस पर पक्के तौर पर भरोसा नहीं कर सकते.
बेहतर होगा कि हम 150 मिलीलीटर रोज़ाना की मियाद पर क़ायम रहकर फलों का रस लें. इससे शरीर में चीनी की मात्रा संतुलित रहेगी. जब जूस में थोड़े रेशे होते हैं, तो ये देर से ख़ून में घुलता है. लेकिन, ज़्यादा तादाद में जूस लेना फिर भी हानिकारक ही है.'
हम जूस निकालने के लिए पका फल लें, तो ये और बेहतर होगा. वैसे हर फल की अलग तासीर होती है. जैसे कि अंगूर को ही लें. इसका जो बीज होता है, उसमें कई अहम अवयव होते हैं, न कि गूदे में. वहीं संतरे के बहुत से पोषक तत्व इसके छिलके में होते हैं.
बहुत से लोग जूस इसलिए लेते हैं कि इससे शरीर में जमा कचरा साफ हो जाएगा. ये शराब, ड्रग या दूसरी नुक़सान करने वाली चीज़ों की वजह से हमारे शरीर में जमा होता है.
लेकिन, जानकार कहते हैं कि जूस पीकर डिटॉक्स करने की सोच हास्यास्पद है. हमारा शरीर ख़ुद को डिटॉक्स करना जानता है. इसलिए जूस गटकने की ज़रूरत नहीं है.
जूस से ही सारे पोषक तत्व मिल जाएं, ऐसा भी नहीं है. कई बार जूस विटामिन मिले चीनी के घोल से ज़्यादा कुछ नहीं होते. फलों के दूसरे हिस्सों में भी पोषक तत्व होते हैं, जो जूस निकालने के दौरान अलग हो जाते हैं.
लोग, दिन में पांच बार फल और सब्ज़ियां खाने की सोचते हैं. उन्हे समझना होगा कि फलों और सब्ज़ियों से केवल विटामिन नहीं हासिल होता. इससे हम कार्बोहाइड्रेट खाने की मात्रा भी घटाते हैं.
तो, कुल मिलाकर ये कहें कि रोज़ाना 150 मिलीलीटर जूस लेते हैं, तो ये नुक़सान नहीं करेगा. फिर भी, बेहतर ये हो कि फलो को खाया जाए, न कि उनका जूस निकालकर पिया जाए.
Tuesday, December 11, 2018
महिलाओं को 'वेडिंग रिंग' क्यों नहीं पहननी चाहिए
मेरी दो बार शादी हो चुकी है और मैं फिर शादी कर सकती हूं. लेकिन मैंने कभी सगाई की अंगूठी की इच्छा नहीं की.
मेरा मानना है कि सगाई की अंगूठी नारीवाद विरोधी है. ये एक ऐसी प्रक्रिया का प्रतीक है जो महिलाओं की आज़ादी की अवधारणा के पूरी तरह विपरीत है.
उंगली में पहनी अंगूठी बताती है कि वो महिला किसी और व्यक्ति की अमानत है.
ये कुछ और स्थितियों की ओर इंगित करती है. अंगूठी में जड़ा हीरा जितना बड़ा होगा, वो पहननेवाली महिलाओं की महिमा उतनी ही बढ़ाएगा.
यहां, अमरीका में मेरे सभी मित्र मेरे विचार से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनमें अधिकांश की उंगलियों में सगाई की अंगूठी है.
कुछ की उंगलियों में दूसरों की तुलना में बड़ी अंगूठी है. आमतौर पर वो इसे सोशल मीडिया में और जब हमारी मुलाक़ात होती है, तो मुझे दिखाते हैं और मेरा मज़ाक़ उड़ाते हैं.
सिर्फ़ मेरी पीढ़ी के लोग ही मेरे विचारों से असहमत नहीं, मेरी बेटी भी मेरा मज़ाक़ उड़ाती है.
नाटकीयता से भरा प्रस्ताव
उसका सपना सगाई की ऐसी अंगूठी पहनना है, जिसे वो गर्व के साथ दूसरों को दिखा सके. मैं उसे समझने की कोशिश करती हूं, क्योंकि मैं जानती हूं कि ये अवधारणा उस संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें उसने जन्म लिया है. लेकिन मैं उस सोच से पूरी तरह असहमत नहीं हूं.
दरअसल मुझे शादी के प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया ही अजीब लगती है. एक व्यक्ति का घुटनों पर टिकने का स्वांग रचना और महिला से उसका हाथ मांगना मुझे बेतुका लगता है. महिला की भूमिका गौण रहती है और उससे बेहद सार्वजनिक तरीक़े से ये पूछा जाता है, जैसे स्टेज पर लाइव या कैमरों के सामने, जो उसे कमज़ोर बनाता है. निश्चित रूप से ये पागलपन है.
किसी से शादी करना रोमांस की हद नहीं होती. ये एक आपसी समझौता होता है. इसके आर्थिक और क़ानूनी नतीजे होते हैं.
अगर मेरा पूर्व-पति मुझे प्रस्ताव रखता, तो मैं हंसती. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, क्योंकि ये एक संवाद था. इस फैसले पर दोनों की सहमति थी.
निश्चित रूप से महिलाएं भी आगे बढ़कर शादी का प्रस्ताव रख सकती हैं. लेकिन ऐसा शायद ही होता है.
चिन्ता इस बात की है कि समाज और मीडिया लड़कियों को बचपन से ही पुरुषों के बारे में सपने दिखाने लगते हैं. बियॉन्से के शब्दों में, "उसे अंगूठी पहना दो." वो लड़कियां बड़ी होते हुए यही सपने देखती हैं कि शादी-शुदा ज़िंदगी उनकी सारी समस्याओं का समाधान कर देगी.
मुझे लगता है कि लड़कियों को शादी करने और अंगूठी पहनने के सपने दिखाने के बजाय आज़ाद ख्याल होने, अध्ययन और तरक़्क़ी करने तथा अपने लिए ख़ुशियां तलाशने के लिए प्रेरित करना चाहिए.
जब मैंने अपने गृह प्रदेश कोलम्बिया के एक अख़बार एल टिम्पो के लिए इसी प्रकार की बातें अपने ब्लॉग में लिखीं, तो पाठकों ने मुझे उग्र नारीवादी बताया और मुझपर रोमांस समाप्त करने का आरोप लगाया. लेकिन ये सच नहीं है. मैं बेहद रोमांटिक हूं. जो बात मुझे रोमांटिक नहीं लगती, वो है, एक "वीर राजकुमार" का इंतज़ार, जो मेरी ज़िंदगी में एक अंगूठी लेकर आएगा.
मेरा मानना है कि सगाई की अंगूठी नारीवाद विरोधी है. ये एक ऐसी प्रक्रिया का प्रतीक है जो महिलाओं की आज़ादी की अवधारणा के पूरी तरह विपरीत है.
उंगली में पहनी अंगूठी बताती है कि वो महिला किसी और व्यक्ति की अमानत है.
ये कुछ और स्थितियों की ओर इंगित करती है. अंगूठी में जड़ा हीरा जितना बड़ा होगा, वो पहननेवाली महिलाओं की महिमा उतनी ही बढ़ाएगा.
यहां, अमरीका में मेरे सभी मित्र मेरे विचार से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनमें अधिकांश की उंगलियों में सगाई की अंगूठी है.
कुछ की उंगलियों में दूसरों की तुलना में बड़ी अंगूठी है. आमतौर पर वो इसे सोशल मीडिया में और जब हमारी मुलाक़ात होती है, तो मुझे दिखाते हैं और मेरा मज़ाक़ उड़ाते हैं.
सिर्फ़ मेरी पीढ़ी के लोग ही मेरे विचारों से असहमत नहीं, मेरी बेटी भी मेरा मज़ाक़ उड़ाती है.
नाटकीयता से भरा प्रस्ताव
उसका सपना सगाई की ऐसी अंगूठी पहनना है, जिसे वो गर्व के साथ दूसरों को दिखा सके. मैं उसे समझने की कोशिश करती हूं, क्योंकि मैं जानती हूं कि ये अवधारणा उस संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें उसने जन्म लिया है. लेकिन मैं उस सोच से पूरी तरह असहमत नहीं हूं.
दरअसल मुझे शादी के प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया ही अजीब लगती है. एक व्यक्ति का घुटनों पर टिकने का स्वांग रचना और महिला से उसका हाथ मांगना मुझे बेतुका लगता है. महिला की भूमिका गौण रहती है और उससे बेहद सार्वजनिक तरीक़े से ये पूछा जाता है, जैसे स्टेज पर लाइव या कैमरों के सामने, जो उसे कमज़ोर बनाता है. निश्चित रूप से ये पागलपन है.
किसी से शादी करना रोमांस की हद नहीं होती. ये एक आपसी समझौता होता है. इसके आर्थिक और क़ानूनी नतीजे होते हैं.
अगर मेरा पूर्व-पति मुझे प्रस्ताव रखता, तो मैं हंसती. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, क्योंकि ये एक संवाद था. इस फैसले पर दोनों की सहमति थी.
निश्चित रूप से महिलाएं भी आगे बढ़कर शादी का प्रस्ताव रख सकती हैं. लेकिन ऐसा शायद ही होता है.
चिन्ता इस बात की है कि समाज और मीडिया लड़कियों को बचपन से ही पुरुषों के बारे में सपने दिखाने लगते हैं. बियॉन्से के शब्दों में, "उसे अंगूठी पहना दो." वो लड़कियां बड़ी होते हुए यही सपने देखती हैं कि शादी-शुदा ज़िंदगी उनकी सारी समस्याओं का समाधान कर देगी.
मुझे लगता है कि लड़कियों को शादी करने और अंगूठी पहनने के सपने दिखाने के बजाय आज़ाद ख्याल होने, अध्ययन और तरक़्क़ी करने तथा अपने लिए ख़ुशियां तलाशने के लिए प्रेरित करना चाहिए.
जब मैंने अपने गृह प्रदेश कोलम्बिया के एक अख़बार एल टिम्पो के लिए इसी प्रकार की बातें अपने ब्लॉग में लिखीं, तो पाठकों ने मुझे उग्र नारीवादी बताया और मुझपर रोमांस समाप्त करने का आरोप लगाया. लेकिन ये सच नहीं है. मैं बेहद रोमांटिक हूं. जो बात मुझे रोमांटिक नहीं लगती, वो है, एक "वीर राजकुमार" का इंतज़ार, जो मेरी ज़िंदगी में एक अंगूठी लेकर आएगा.
Tuesday, November 20, 2018
मीडियाटेक हीलियो पी70 प्रोसेसर वाला दुनिया का पहला फोन होगा
चीनी कंपनी Oppo जल्द ही अपने Realme सब-ब्रांड के तहत एक और नया स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है और इस फोन को U-सीरीज के तहत लॉन्च किया जाएगा। इस फोन को 28 नवंबर को भारत में लॉन्च किया जाएगा, जिसका नाम Realme U1 हो सकता है। ये दुनिया का पहला फोन होगा जिसमें मीडियाटेक का लेटेस्ट प्रोसेसर मीडियाटेक हीलियो पी70 प्रोसेसर दिया जाएगा। इसके अलावा इसकी बिक्री एक्सक्लूसिव तौर पर अमेजन पर की जाएगी।
वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले मिल सकता है
टेक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Realme U1 में वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले मिल सकता है। हालांकि, इसके स्क्रीन साइज और रेजोल्यूशन को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
इसके अलावा इस फोन को भी सेल्फी लवर्स को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। इसमें 25 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा मिल सकता है। जबकि रियर पर ड्युअल कैमरा होगा, जिसका प्राइमरी सेंसर 16 मेगापिक्सल और सेकेंडरी सेंसर 2.5 मेगापिक्सल का हो सकता है।
तीन वैरिएंट में आ सकता है
Realme U1 को कंपनी तीन वैरिएंट में लॉन्च कर सकती है, जिसका शुरुआती वैरिएंट 4 जीबी रैम के साथ आ सकता है। वहीं इसका 6 जीबी रैम, 64 जीबी स्टोरेज और 8 जीबी रैम, 128 जीबी स्टोरेज वाला वैरिएंट भी आने की उम्मीद है।
इसके स्पेसिफिकेशन, कीमत और फीचर्स को लेकर ज्यादा जानकारी तो सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि Realme 2 Pro की तरह ही इसे भी 20 हजार तक की रेंज में लॉन्च किया जा सकता है।
6 महीने में 30 लाख से ज्यादा फोन बिके
काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, Realme पहला ब्रांड है जिसने लॉन्च होने के पहले 5 महीनों में ही 10 लाख से ज्यादा स्मार्टफोन बेचे। इसके अलावा Realme भारत का चौथा सबसे बड़ा ऑनलाइन ब्रांड है। कंपनी का दावा है कि उसने सिर्फ 6 महीने में ही इस ब्रांड के 30 लाख से ज्यादा फोन को बेचा है।
वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले मिल सकता है
टेक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Realme U1 में वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले मिल सकता है। हालांकि, इसके स्क्रीन साइज और रेजोल्यूशन को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
इसके अलावा इस फोन को भी सेल्फी लवर्स को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। इसमें 25 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा मिल सकता है। जबकि रियर पर ड्युअल कैमरा होगा, जिसका प्राइमरी सेंसर 16 मेगापिक्सल और सेकेंडरी सेंसर 2.5 मेगापिक्सल का हो सकता है।
तीन वैरिएंट में आ सकता है
Realme U1 को कंपनी तीन वैरिएंट में लॉन्च कर सकती है, जिसका शुरुआती वैरिएंट 4 जीबी रैम के साथ आ सकता है। वहीं इसका 6 जीबी रैम, 64 जीबी स्टोरेज और 8 जीबी रैम, 128 जीबी स्टोरेज वाला वैरिएंट भी आने की उम्मीद है।
इसके स्पेसिफिकेशन, कीमत और फीचर्स को लेकर ज्यादा जानकारी तो सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि Realme 2 Pro की तरह ही इसे भी 20 हजार तक की रेंज में लॉन्च किया जा सकता है।
6 महीने में 30 लाख से ज्यादा फोन बिके
काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, Realme पहला ब्रांड है जिसने लॉन्च होने के पहले 5 महीनों में ही 10 लाख से ज्यादा स्मार्टफोन बेचे। इसके अलावा Realme भारत का चौथा सबसे बड़ा ऑनलाइन ब्रांड है। कंपनी का दावा है कि उसने सिर्फ 6 महीने में ही इस ब्रांड के 30 लाख से ज्यादा फोन को बेचा है।
Monday, November 19, 2018
米奇诞生90年:版权将过期 迪士尼或失“摇钱树”
中新网11月19日电 据香港《大公报》报道,当地时间18日,美国迪士尼经典卡通形象米奇迎来90岁“大寿”。然而,根据1998年通过的美国版权法,米奇版权将于2023年到期,届时其形象使用权将放开,迪士尼或将失去这棵“摇钱
米奇老鼠由华特迪士尼创作于1928年,自诞生以来,很快获得美国观众青睐,并风靡全球。
为了纪念米奇诞生90周年,迪士尼公司在纽约举办了一场“米奇:真实原创展览”,回顾米奇的诞生历史,并展示艺术家以米奇为题材创作的艺术品。这场展览将持续到2019年2月10日。
每年“吸金”250亿
迪士尼将米奇印在各种产品上,这种商业模式令米奇变身“摇钱树”,亦推高了米奇系列的人气。米奇、米妮及高飞等经典角色商品是迪士尼最吸金的“金蛋”,每年至少带来32亿美元收入,这还未包括迪士尼商品或主题乐园的收入。
然而,随着米奇“年事已高”,迪士尼公司第三次面临版权危机。此前两次米奇的版权失效,都离不开迪士尼背后的强大游说活动,带来了美国有关版权法的变更。
美国版权法变更,第一次发生在20世纪70年代,当时版权期限为56年,意味着迪士尼在1984年就会失去米奇的版权。但在迪士尼等公司强力游说下,美国国会通过延长版权期限,改为创作人终身加上死后50年,公司版权则为作品面世后75年。
第二次则是1998年,1923年创作的作品75年的版权期限即将届满,迪士尼再次通过游说活动,令国会第二度通过延长版权期限。
按照当前美国于1998年通过的最新版权法,凡于1923年前创作的作品,目前版权期限已经过期;而1923年后创作的作品,版权期限是创作人终身加上死后70年的时间,公司的版权期限,则是从作品面世后起计95年。一旦过了期限,这些作品就将归属“公众领域”,不受版权法保护。
这意味着,五年后,可能任何人都有权使用米奇形象生产商品或进行创作,而毋须再向迪士尼公司支付版权费。
或注册为商标
外界认为,这次迪士尼或者会再次极力游说国会延期。有分析认为,自1998年至今20多年来,网络及版权议题发展迅速,民众可轻易上网找到作品,迪士尼若要三度延长版权期限或会面临社会极大阻力.
米奇老鼠由华特迪士尼创作于1928年,自诞生以来,很快获得美国观众青睐,并风靡全球。
为了纪念米奇诞生90周年,迪士尼公司在纽约举办了一场“米奇:真实原创展览”,回顾米奇的诞生历史,并展示艺术家以米奇为题材创作的艺术品。这场展览将持续到2019年2月10日。
每年“吸金”250亿
迪士尼将米奇印在各种产品上,这种商业模式令米奇变身“摇钱树”,亦推高了米奇系列的人气。米奇、米妮及高飞等经典角色商品是迪士尼最吸金的“金蛋”,每年至少带来32亿美元收入,这还未包括迪士尼商品或主题乐园的收入。
然而,随着米奇“年事已高”,迪士尼公司第三次面临版权危机。此前两次米奇的版权失效,都离不开迪士尼背后的强大游说活动,带来了美国有关版权法的变更。
美国版权法变更,第一次发生在20世纪70年代,当时版权期限为56年,意味着迪士尼在1984年就会失去米奇的版权。但在迪士尼等公司强力游说下,美国国会通过延长版权期限,改为创作人终身加上死后50年,公司版权则为作品面世后75年。
第二次则是1998年,1923年创作的作品75年的版权期限即将届满,迪士尼再次通过游说活动,令国会第二度通过延长版权期限。
按照当前美国于1998年通过的最新版权法,凡于1923年前创作的作品,目前版权期限已经过期;而1923年后创作的作品,版权期限是创作人终身加上死后70年的时间,公司的版权期限,则是从作品面世后起计95年。一旦过了期限,这些作品就将归属“公众领域”,不受版权法保护。
这意味着,五年后,可能任何人都有权使用米奇形象生产商品或进行创作,而毋须再向迪士尼公司支付版权费。
或注册为商标
外界认为,这次迪士尼或者会再次极力游说国会延期。有分析认为,自1998年至今20多年来,网络及版权议题发展迅速,民众可轻易上网找到作品,迪士尼若要三度延长版权期限或会面临社会极大阻力.
Friday, November 16, 2018
रोमांटिक गाने में दिखी सुशांत-सारा की केमिस्ट्री
बॉलीवुड के नवाब सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान की डेब्यू फिल्म रिलीज होने जा रही है. फिल्म का ट्रेलर पहले ही रिलीज किया जा चुका है. फिल्म का दूसरा गाना भी रिलीज कर दिया गया है. ये एक वेडिंग सॉन्ग है. गाने में सुशांत सिंह राजपूत और सारा मुख्य पात्र हैं.
गाने का नाम स्वीटहार्ट है. गाना वेडिंग के दौरान फिल्माया गया है. वीडियो में सुशांत, सारा के लिए गाते और डांस करते नजर आ रहे हैं. गाने के अंत में सारा अली खान भी सुशांत के साथ डांस करती हुई दिख रही हैं. गाने को देव नेगी ने गाया है और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं.
केदारनाथ का निर्देशन अभिषेक कपूर ने किया है. फिल्म का निर्माण संयुक्त रूप से अभिषेक कपूर और रोनी स्क्रूवाला कर रहे हैं . फिल्म के म्यूजिक की बात करें तो इसका म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने दिया है. फिल्म 7 दिसंबर, 2018 में रिलीज की जाएगी.
फिल्म के ट्रेलर की बात करें तो पहली नजर में ट्रेलर एक धमाकेदार प्रेमकहानी को बंया करते नजर आता है. जिसमें एक हिंदू लड़की (सारा अली खान) को मुस्लिम लड़के (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार हो जाता है. एक तरफ दोनों के अपने प्यार को पाने के लिए समाज से लड़ते दिखाए जाते हैं.
वहीं दूसरी तरफ केदारनाथ में प्रलय में डूबते दिखाई देते हैं. सारा अली खान ने पहली फिल्म में ही जबरदस्त एक्टिंग स्किल दिखाई है. न्यूकमर एक्टर में जहां अक्सर एक्सप्रेशन की कमी देखने को मिलती है, वहीं सारा ने इमोशनल सीन में बेहतरीन अदाकारी की है.
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गुरुवार रात 12:30 बजे कांग्रेस ने राजस्थान के अपने 152 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी. पहली सूची में कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का नाम है. इसमें टोंक विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट चुनाव लड़ रहे हैं जबकि पार्टी महासचिव अशोक गहलोत अपनी परंपरागत सीट जोधपुर के सरदारपुरा से चुनाव लड़ेंगे.
गहलोत और पायलट ने बुधवार को अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि वे चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस ने राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष गिरिजा व्यास को उदयपुर से, वहीं वरिष्ठ नेता सीपी जोशी को नाथद्वारा से चुनाव मैदान में उतारा है.
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर लाल डूडी नोखा सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे. बुधवार को ही बीजेपी छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए सांसद हरीश मीणा को देवली उनियारा से मैदान में उतारा गया है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के महासचिव मुकुल वासनिक ने सूची जारी की.
इसी तरह से भंवरी देवी कांड में जेल में बंद महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा को भी जोधपुर के ओसियां से विधानसभा में उतारा गया है. कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता सीपी जोशी एक बार फिर से नाथद्वारा सीट से अपना भाग्य आजमा रहे हैं. यहां पर पिछली बार 1 वोट से चुनाव हार गए थे. इसके अलावा अभी इसी साल अजमेर से सांसद बने रघु शर्मा को केकड़ी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है.
मोदी लहर के बावजूद पिछली बार कांग्रेस के जीते सभी विधायकों को दोबारा कांग्रेस ने टिकट थमाया है. एक दिन पहले ही बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए 5 बार के विधायक हबीबुर्रहमान को कांग्रेस ने नागौर से टिकट दिया है. अशोक गहलोत के पिछले मंत्रिमंडल में शामिल ज्यादातर मंत्रियों को टिकट थमाया गया है, लेकिन कांग्रेस ने 152 प्रत्याशियों की सूची में करीब 40 नए चेहरों को भी उतारा है.
गाने का नाम स्वीटहार्ट है. गाना वेडिंग के दौरान फिल्माया गया है. वीडियो में सुशांत, सारा के लिए गाते और डांस करते नजर आ रहे हैं. गाने के अंत में सारा अली खान भी सुशांत के साथ डांस करती हुई दिख रही हैं. गाने को देव नेगी ने गाया है और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं.
केदारनाथ का निर्देशन अभिषेक कपूर ने किया है. फिल्म का निर्माण संयुक्त रूप से अभिषेक कपूर और रोनी स्क्रूवाला कर रहे हैं . फिल्म के म्यूजिक की बात करें तो इसका म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने दिया है. फिल्म 7 दिसंबर, 2018 में रिलीज की जाएगी.
फिल्म के ट्रेलर की बात करें तो पहली नजर में ट्रेलर एक धमाकेदार प्रेमकहानी को बंया करते नजर आता है. जिसमें एक हिंदू लड़की (सारा अली खान) को मुस्लिम लड़के (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार हो जाता है. एक तरफ दोनों के अपने प्यार को पाने के लिए समाज से लड़ते दिखाए जाते हैं.
वहीं दूसरी तरफ केदारनाथ में प्रलय में डूबते दिखाई देते हैं. सारा अली खान ने पहली फिल्म में ही जबरदस्त एक्टिंग स्किल दिखाई है. न्यूकमर एक्टर में जहां अक्सर एक्सप्रेशन की कमी देखने को मिलती है, वहीं सारा ने इमोशनल सीन में बेहतरीन अदाकारी की है.
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गुरुवार रात 12:30 बजे कांग्रेस ने राजस्थान के अपने 152 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी. पहली सूची में कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का नाम है. इसमें टोंक विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट चुनाव लड़ रहे हैं जबकि पार्टी महासचिव अशोक गहलोत अपनी परंपरागत सीट जोधपुर के सरदारपुरा से चुनाव लड़ेंगे.
गहलोत और पायलट ने बुधवार को अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि वे चुनाव लड़ेंगे. कांग्रेस ने राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष गिरिजा व्यास को उदयपुर से, वहीं वरिष्ठ नेता सीपी जोशी को नाथद्वारा से चुनाव मैदान में उतारा है.
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर लाल डूडी नोखा सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे. बुधवार को ही बीजेपी छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए सांसद हरीश मीणा को देवली उनियारा से मैदान में उतारा गया है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के महासचिव मुकुल वासनिक ने सूची जारी की.
इसी तरह से भंवरी देवी कांड में जेल में बंद महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा को भी जोधपुर के ओसियां से विधानसभा में उतारा गया है. कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता सीपी जोशी एक बार फिर से नाथद्वारा सीट से अपना भाग्य आजमा रहे हैं. यहां पर पिछली बार 1 वोट से चुनाव हार गए थे. इसके अलावा अभी इसी साल अजमेर से सांसद बने रघु शर्मा को केकड़ी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है.
मोदी लहर के बावजूद पिछली बार कांग्रेस के जीते सभी विधायकों को दोबारा कांग्रेस ने टिकट थमाया है. एक दिन पहले ही बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए 5 बार के विधायक हबीबुर्रहमान को कांग्रेस ने नागौर से टिकट दिया है. अशोक गहलोत के पिछले मंत्रिमंडल में शामिल ज्यादातर मंत्रियों को टिकट थमाया गया है, लेकिन कांग्रेस ने 152 प्रत्याशियों की सूची में करीब 40 नए चेहरों को भी उतारा है.
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